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मेरी चाहत


मेरा दिल है तेरा दीवाना ।
मगर चाहत से मेरी ,
तू क्यों है अंजाना |
यह तेरे प्यार का मौसम ,
लगता है मुझको सुहाना |
 मैं शमा हूं !
 जलती  हूं ऐसे ,
जैसे जले परवाना |
आंखों के रस्ते से तू रहे ,
 मेरी धड़कन में समाता |
 जब पलकें मैं बंद करती हूं ,
 तेरा ही चेहरा है नजर आता |
 मैं खिल के हंसती हूं ,
 आता है याद  जब तेरा धीरे से मुस्काना |
 चाहती हूं मैं तेरी धड़कन में ,
 अपनी धड़कनों को मिलाना |
 करूं कैसे मैं जाहिर प्यार अपना ,
आँसा नहीं लफ्जों में यह बतलाना |
 बस इतना ही मैं कहती हूं ...
 जिन्दगी चाहूं मैं अपनी ,
 तेरी बाहों में बितलाना |

                                      - S.R

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