मगर चाहत से मेरी ,
तू क्यों है अंजाना |
यह तेरे प्यार का मौसम ,
लगता है मुझको सुहाना |
मैं शमा हूं !
जलती हूं ऐसे ,
जैसे जले परवाना |
आंखों के रस्ते से तू रहे ,
मेरी धड़कन में समाता |
जब पलकें मैं बंद करती हूं ,
तेरा ही चेहरा है नजर आता |
मैं खिल के हंसती हूं ,
आता है याद जब तेरा धीरे से मुस्काना |
चाहती हूं मैं तेरी धड़कन में ,
अपनी धड़कनों को मिलाना |
करूं कैसे मैं जाहिर प्यार अपना ,
आँसा नहीं लफ्जों में यह बतलाना |
बस इतना ही मैं कहती हूं ...
जिन्दगी चाहूं मैं अपनी ,
तेरी बाहों में बितलाना |
- S.R

Very nice 👌👌
ReplyDeleteThanku dear
ReplyDelete