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मेरी चाहत


मेरा दिल है तेरा दीवाना ।
मगर चाहत से मेरी ,
तू क्यों है अंजाना |
यह तेरे प्यार का मौसम ,
लगता है मुझको सुहाना |
 मैं शमा हूं !
 जलती  हूं ऐसे ,
जैसे जले परवाना |
आंखों के रस्ते से तू रहे ,
 मेरी धड़कन में समाता |
 जब पलकें मैं बंद करती हूं ,
 तेरा ही चेहरा है नजर आता |
 मैं खिल के हंसती हूं ,
 आता है याद  जब तेरा धीरे से मुस्काना |
 चाहती हूं मैं तेरी धड़कन में ,
 अपनी धड़कनों को मिलाना |
 करूं कैसे मैं जाहिर प्यार अपना ,
आँसा नहीं लफ्जों में यह बतलाना |
 बस इतना ही मैं कहती हूं ...
 जिन्दगी चाहूं मैं अपनी ,
 तेरी बाहों में बितलाना |

                                      - S.R

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हे मर्यादा पुरूषोत्तम राम ।  हे  जग  के  रखवाले राम ।। आओ  लेके फिर से जन्म  । मनुष्य करने लगा बडे कुकरम  ।। सुन के तुमको परेशानी होगी ।  रावण  को भी  हैरानी  होगी  ।। बात  कही  न  जाय  मुझसे   । आकर देख लो तुम  खुद से ।।  ये  जो  तुमको  ध्यानते   है   ।  आदर्श   तुम्हारे ही नही मानते है ।।  जग  मे  मचा  पडा  कोहराम ।  रक्षा   करो    हे   श्री   राम    । ।                                                 S.R    

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