न जाने क्या बैहसियत,हैवानियत सवार थी ।
खाने को दिया खाना जिस में अंगार ही अंगार थी ।।
जाने कितना वो रोयी कितना वो चिल्लाई होगी ।
बच्चे को न देख पाने की कसक उसके दिल में भी आई होगी।।
उसकी ममता ने उसको भी दिया इशारा होगा ।
"कोई मेरे बच्चे को बचा लो" उसने भी पुकारा होगा ।।
गर होती वो इंसान तो कोई सबूत दे जाती।
जानवर थी बेचारी कैसै कुछ कह पाती ।।
शायद इसी वजह से उन्होने अपनी दुनिया अलग बसाई है।
इंसान है सबसे बडा़ निरदयी ,जानवर ने तो केवल जानवर की जात ही पायी है।।
S.R


So related... Deep down sad
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